भूमिका
upsc mains practice SET 2026 : वर्ष 2014 में भारत ने अपनी पूर्ववर्ती “लुक ईस्ट नीति” को अधिक सक्रिय और परिणामोन्मुख बनाते हुए “एक्ट ईस्ट नीति” को अपनाया। इसका उद्देश्य केवल व्यापार एवं आर्थिक सहयोग तक सीमित न रहकर दक्षिण-पूर्व एशिया तथा व्यापक हिंद-प्रशांत क्षेत्र के साथ रणनीतिक, upsc mains सुरक्षा, सांस्कृतिक और संपर्क (Connectivity) संबंधों को सुदृढ़ करना है। यह नीति भारत की इंडो-पैसिफिक दृष्टि, पड़ोसी प्रथम नीति तथा सागर (Security and Growth for All in the Region) जैसी पहलों का भी महत्वपूर्ण आधार है।
आर्थिक सहभागिता से आगे रणनीतिक एवं सुरक्षा सहयोग का विस्तार
- भारत और आसियान (ASEAN) देशों के साथ संबंध अब बहुआयामी रणनीतिक साझेदारी का रूप ले चुके हैं।
- भारत, क्वाड (Quad) के माध्यम से समुद्री सुरक्षा, आपदा प्रबंधन, उभरती प्रौद्योगिकियों तथा आपूर्ति शृंखला की सुरक्षा पर सहयोग बढ़ा रहा है।
- मलाबार नौसैनिक अभ्यास तथा सिम्बेक्स (SIMBEX), मिलन एवं अन्य संयुक्त सैन्य अभ्यासों ने रक्षा सहयोग को नई दिशा दी है।
- भारत ने वियतनाम, फिलीपींस, इंडोनेशिया और सिंगापुर जैसे देशों के साथ रक्षा प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण तथा रक्षा उपकरणों की आपूर्ति को बढ़ावा दिया है।
- समुद्री डोमेन जागरूकता (Maritime Domain Awareness), आतंकवाद-रोधी सहयोग, upsc mains साइबर सुरक्षा तथा मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (HADR) जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग उल्लेखनीय रूप से बढ़ा है।
- उत्तर-पूर्व भारत को हिंद-प्रशांत क्षेत्र से जोड़ने हेतु विभिन्न क्षेत्रीय मंचों और बहुपक्षीय पहलों में भारत की सक्रिय भागीदारी बढ़ी है।
संपर्क (Connectivity) संबंधी प्रमुख बाधाएँ
- भारत–म्यांमार–थाईलैंड त्रिपक्षीय राजमार्ग तथा कलादान बहु-माध्यम परिवहन परियोजना जैसी परियोजनाएँ वर्षों से विलंब का सामना कर रही हैं।
- म्यांमार में राजनीतिक अस्थिरता और सुरक्षा चुनौतियों के upsc mains कारण अवसंरचना परियोजनाओं की प्रगति प्रभावित हुई है।
- उत्तर-पूर्व भारत में सीमित सड़क, रेल, सीमा अवसंरचना तथा लॉजिस्टिक सुविधाएँ संपर्क को बाधित करती हैं।
- सीमा शुल्क प्रक्रियाओं की जटिलता, upsc mains गैर-शुल्कीय बाधाएँ तथा डिजिटल संपर्क का अभाव व्यापार को सीमित करते हैं।
- चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) की तुलना में भारत की परियोजनाओं के क्रियान्वयन की गति अपेक्षाकृत धीमी रही है।
- परियोजनाओं में वित्तीय संसाधनों की कमी, बहु-स्तरीय प्रशासनिक प्रक्रियाएँ तथा विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय का अभाव भी प्रमुख कारण हैं।
आगे की राह
- संपर्क परियोजनाओं को समयबद्ध रूप से पूरा करने हेतु विशेष निगरानी तंत्र विकसित किया जाए।
- उत्तर-पूर्व भारत में मल्टी-मॉडल परिवहन, सीमा व्यापार केंद्रों और डिजिटल अवसंरचना का विस्तार किया जाए।
- सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) तथा जापान, आसियान और अन्य साझेदार देशों के साथ संयुक्त निवेश को प्रोत्साहित किया जाए।
- सीमा शुल्क प्रक्रियाओं को सरल बनाकर निर्बाध व्यापार एवं लोगों के आवागमन को बढ़ावा दिया जाए।
- समुद्री संपर्क, ब्लू इकोनॉमी और क्षेत्रीय आपूर्ति शृंखलाओं में भारत की भूमिका को और सशक्त बनाया जाए।
निष्कर्ष
निस्संदेह, भारत की एक्ट ईस्ट नीति आर्थिक सहयोग से आगे बढ़कर हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक एवं सुरक्षा साझेदारी का प्रभावी माध्यम बन चुकी है। upsc mains किंतु जब तक भौतिक, डिजिटल और संस्थागत संपर्क की चुनौतियों का समाधान नहीं किया जाता, तब तक इस नीति की पूर्ण क्षमता साकार नहीं हो सकेगी। अतः समयबद्ध अवसंरचना विकास, क्षेत्रीय सहयोग और प्रभावी क्रियान्वयन के माध्यम से भारत अपनी एक्ट ईस्ट नीति को अधिक सफल एवं परिणामकारी बना सकता है।
