UPSC Success Story: ₹165 की स्कूल फीस से IAS अधिकारी बनने तक का भावुक सफर – श्वेता अग्रवाल की कहानी

UPSC Motivation in Hindi: क्या एक छोटे से शहर की लड़की, जिसके जन्म पर परिवार में खुशियाँ नहीं मनाई गई थीं, देश की सबसे कठिन परीक्षा पास कर सकती है? जी हाँ, यह कहानी है आईएएस अधिकारी श्वेता अग्रवाल (IAS Shweta Agarwal) की, जिन्होंने न केवल अपनी किस्मत बदली, बल्कि समाज की रूढ़िवादी सोच को भी करारा जवाब दिया।

एक “अवांछित” बेटी से ‘वंश का नाम’ रोशन करने तक का सफर

श्वेता का जन्म पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के एक छोटे से कस्बे भद्रेश्वर में एक रूढ़िवादी मारवाड़ी परिवार में हुआ था। उनके जन्म पर उनके माता-पिता के अलावा कोई खुश नहीं था, क्योंकि उनके दादा-दादी को ‘वंश’ आगे बढ़ाने के लिए बेटा चाहिए था। लेकिन उनके माता-पिता ने समाज और परिवार के खिलाफ जाकर श्वेता को बेहतरीन शिक्षा देने का फैसला किया।

जब शगुन के पैसों से भरी जाती थी स्कूल की फीस

श्वेता के पिता व्यावहारिक रूप से बेरोजगार थे और उन्होंने अपनी बेटी की ₹165 प्रति माह की स्कूल फीस भरने के लिए दिहाड़ी मजदूर के रूप में भी काम किया। श्वेता बताती हैं कि बचपन में जब रिश्तेदार उन्हें शगुन के तौर पर 5 या 10 रुपये देते थे, तो वह उनसे मिठाई खरीदने के बजाय अपनी माँ को दे देती थीं ताकि स्कूल की फीस जमा हो सके।

सात साल की उम्र में ही श्वेता ने समझ लिया था कि उनकी शिक्षा ही उनका सबसे बड़ा हथियार है। उनके परिवार में उनसे पहले किसी ने ग्रेजुएशन भी नहीं की थी, और लोग कहते थे कि “पढ़-लिखकर क्या करना है, अंत में तो चौका-बर्तन ही करना है”।

एक अपमान जिसने बदल दी जिंदगी

17 साल की उम्र में, एक सरकारी दफ्तर के चक्कर काटते हुए श्वेता इतनी हताश और क्रोधित हो गईं कि उन्होंने वहां के अधिकारियों से कह दिया, “एक दिन मैं डीएम (DM) बनकर वापस आऊंगी”। उस समय उन्हें नहीं पता था कि डीएम बनने के लिए क्या करना पड़ता है, लेकिन वह सपना उनके दिल में घर कर गया था।

शानदार नौकरी छोड़ी और शुरू किया संघर्ष

श्वेता ने Deloitte जैसी बड़ी कंपनी में मैनेजर की नौकरी छोड़कर यूपीएससी की तैयारी शुरू की। जब उनके बॉस ने उन्हें डराया कि 5 लाख लोगों में से केवल 90 ही आईएएस बनते हैं, तो श्वेता का आत्मविश्वास अडिग था। उन्होंने कहा, “अगर 90 लोग बनते हैं, तो मैं उनमें से एक होऊंगी”

हार नहीं मानी: IRS, फिर IPS और अंत में IAS

श्वेता की यात्रा आसान नहीं थी। 2011 में वह मानसिक रूप से काफी परेशान थीं और तैयारी बीच में ही छूट गई थी। लेकिन उन्होंने खुद को संभाला और कोलकाता में एक छोटे से कमरे में अकेले रहकर पढ़ाई की। उनकी मेहनत रंग लाई:

  1. 2013: AIR 497 हासिल कर वह IRS बनीं।
  2. 2015: AIR 141 हासिल कर वह IPS बनीं और अपना ‘खाकी’ पहनने का बचपन का सपना पूरा किया।
  3. 2016: अंततः, अपने आखिरी प्रयास में उन्होंने AIR 19 हासिल की और पश्चिम बंगाल की स्टेट टॉपर बनकर IAS का अपना लक्ष्य प्राप्त किया।

UPSC उम्मीदवारों के लिए श्वेता का संदेश

श्वेता कहती हैं कि भविष्य उन लोगों का है जो अपने सपनों की सुंदरता में विश्वास करते हैं। उनकी कहानी हमें सिखाती है कि:

  • दृढ़ संकल्प (Determination): परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन हों, आपका संकल्प मजबूत होना चाहिए।
  • कठिन परिश्रम (Hard Work): सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं है; हर दिन 8-9 घंटे की पढ़ाई जरूरी है।
  • हार न मानना: यदि आप वास्तव में कुछ चाहते हैं, तो पूरी कायनात उसे आपको दिलाने में लग जाती है।

निष्कर्ष: श्वेता अग्रवाल की यह कहानी उन लाखों UPSC उम्मीदवारों के लिए प्रेरणा है जो संसाधनों की कमी या पारिवारिक दबाव से जूझ रहे हैं। अगर भद्रेश्वर की एक लड़की आईएएस बन सकती है, तो आप भी बन सकते हैं!


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