Upsc History Notes Hindi : भारत का स्वतंत्रता आंदोलन (Indian Freedom Struggle) लगभग एक शताब्दी तक चलने वाला व्यापक राजनीतिक, सामाजिक और जन-आंदोलन था। 1857 के विद्रोह से लेकर 15 अगस्त 1947 को भारत की स्वतंत्रता तक अनेक आंदोलन, संगठन, कानून, समझौते और राजनीतिक घटनाएँ हुईं।
इस आंदोलन में प्रारंभिक राजनीतिक संगठनों से लेकर स्वदेशी आंदोलन, असहयोग आंदोलन, सविनय अवज्ञा आंदोलन, भारत छोड़ो आंदोलन History Notes और क्रांतिकारी गतिविधियों तक विभिन्न धाराएँ शामिल थीं।
UPSC और State PCS में इस topic से अक्सर chronology, causes, leaders, Acts, movements और उनके outcomes से जुड़े प्रश्न पूछे जाते हैं।
भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की शुरुआत कैसे हुई : Upsc History Notes Hindi
1857 का विद्रोह ब्रिटिश शासन के खिलाफ सबसे बड़ा प्रारंभिक व्यापक विद्रोह था। इसके बाद ब्रिटिश शासन सीधे Crown के अधीन चला गया।
इसके बाद भारतीयों में political awareness धीरे-धीरे बढ़ी और नए संगठनों तथा आंदोलनों का विकास हुआ।
Broad Timeline
1857 → 1885 → 1905 → 1907 → 1915 → 1917 → 1919 → 1920 → 1930 → 1931 → 1932 → 1935 → 1942 → 1946 → 1947
इसे विस्तार से समझते हैं।
1. 1857 का विद्रोह
समय: 1857–58
1857 का विद्रोह ब्रिटिश शासन के विरुद्ध पहला बड़ा व्यापक armed uprising था।
प्रमुख कारण
- राजनीतिक हस्तक्षेप
- Doctrine of Lapse
- आर्थिक शोषण
- सैनिक असंतोष
- सामाजिक और धार्मिक आशंकाएँ
- चर्बी वाले कारतूस का विवाद
प्रमुख नेता
- बहादुर शाह जफर – दिल्ली
- रानी लक्ष्मीबाई – झाँसी
- नाना साहेब – कानपुर
- तात्या टोपे
- बेगम हजरत महल – अवध
- कुंवर सिंह – बिहार
विद्रोह असफल रहा, लेकिन इसके बाद 1858 में ईस्ट इंडिया कंपनी का शासन समाप्त हुआ और History Notes भारत सीधे ब्रिटिश Crown के अधीन चला गया।
2. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना – 1885
28 दिसंबर 1885 को Bombay में Indian National Congress (INC) की स्थापना हुई।
इसके प्रथम अध्यक्ष W.C. Bonnerjee (व्योमेश चंद्र बनर्जी) थे।
A.O. Hume ने कांग्रेस की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
प्रारंभिक कांग्रेस की प्रमुख मांगें
- प्रशासन में भारतीयों की अधिक भागीदारी
- Legislative Councils का विस्तार
- Civil Services में भारतीयों के अवसर
- आर्थिक शोषण पर सवाल
- प्रशासनिक सुधार
प्रारंभिक चरण के नेताओं को सामान्यतः Moderates कहा जाता है।
प्रमुख नेता
- दादाभाई नौरोजी
- सुरेंद्रनाथ बनर्जी
- गोपाल कृष्ण गोखले
- फिरोजशाह मेहता
3. बंगाल विभाजन – 1905
16 अक्टूबर 1905 को वायसराय लॉर्ड कर्जन ने बंगाल का विभाजन लागू किया।
ब्रिटिश सरकार ने इसे administrative convenience से जोड़ा, जबकि भारतीय राष्ट्रवादियों ने इसे Divide and Rule की नीति के रूप में देखा।
इसका परिणाम हुआ:
स्वदेशी आंदोलन
भारतीयों ने:
- विदेशी वस्तुओं का boycott
- स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग
- राष्ट्रीय शिक्षा
- सार्वजनिक सभाएँ
- राजनीतिक जागरूकता
को बढ़ावा दिया।
महत्व
स्वदेशी आंदोलन ने nationalism को अधिक mass participation की ओर बढ़ाया।
4. मुस्लिम लीग की स्थापना – 1906
30 दिसंबर 1906 को ढाका में All-India Muslim League की स्थापना हुई।
इस संगठन ने आगे चलकर भारतीय राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
5. सूरत विभाजन – 1907
1907 में कांग्रेस के सूरत अधिवेशन में Moderates और Extremists के बीच गंभीर मतभेद सामने आए।
Moderates
- संवैधानिक तरीकों में विश्वास
- petitions और discussions
- gradual reforms
Extremists
- अधिक assertive nationalism
- boycott
- swadeshi
- mass mobilisation
प्रमुख Extremist नेताओं में:
लाल-बाल-पाल
- लाला लाजपत राय
- बाल गंगाधर तिलक
- बिपिन चंद्र पाल
6. बंगाल विभाजन की समाप्ति – 1911
1911 में ब्रिटिश सरकार ने बंगाल विभाजन को रद्द कर दिया।
इसी समय भारत की राजधानी कलकत्ता से दिल्ली स्थानांतरित करने की घोषणा हुई।
7. गांधीजी का भारत आगमन – 1915
मोहनदास करमचंद गांधी 1915 में दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटे।
भारत में उन्होंने History Notes पहले स्थानीय आंदोलनों के माध्यम से अपने political methods को विकसित किया।
उनकी राजनीति में:
- सत्याग्रह
- अहिंसा
- जनभागीदारी
- नैतिक दबाव
महत्वपूर्ण रहे।
8. चंपारण सत्याग्रह – 1917
1917 में गांधीजी ने बिहार के चंपारण में किसानों के समर्थन में आंदोलन किया।
किसानों को नील की खेती से संबंधित समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था।
महत्व
चंपारण सत्याग्रह गांधीजी का भारत में पहला प्रमुख सत्याग्रह माना जाता है।
9. अहमदाबाद मिल हड़ताल – 1918
1918 में गांधीजी ने अहमदाबाद के textile workers के विवाद में हस्तक्षेप किया।
यह आंदोलन labour movement के संदर्भ में महत्वपूर्ण है।
10. खेड़ा सत्याग्रह – 1918
गुजरात के खेड़ा में किसानों ने खराब फसल के कारण लगान में राहत की मांग की।
गांधीजी ने किसानों के समर्थन में सत्याग्रह किया।
याद रखें
1917 – चंपारण → किसान
1918 – अहमदाबाद → मजदूर
1918 – खेड़ा → किसान
11. रॉलेट एक्ट – 1919
ब्रिटिश सरकार ने Rowlatt Act, 1919 लागू किया।
इस कानून ने सरकार को राजनीतिक गतिविधियों और suspected revolutionary activities के खिलाफ कठोर कार्रवाई की शक्तियाँ दीं।
गांधीजी ने इसका विरोध किया और nationwide protest की अपील की।
12. जलियांवाला बाग हत्याकांड – 13 अप्रैल 1919
13 अप्रैल 1919 को अमृतसर के जलियांवाला बाग में जनरल रेजिनाल्ड डायर के History Notes आदेश पर शांतिपूर्ण सभा पर गोली चलवाई गई।
इस घटना का भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन पर गहरा प्रभाव पड़ा।
इसके बाद ब्रिटिश शासन के प्रति विश्वास और अधिक कमजोर हुआ।
13. असहयोग आंदोलन – 1920–22
गांधीजी ने 1920 में Non-Cooperation Movement शुरू किया।
इसका उद्देश्य ब्रिटिश शासन के साथ cooperation को समाप्त करके राजनीतिक दबाव बनाना था।
प्रमुख कार्यक्रम
- सरकारी संस्थानों का boycott
- विदेशी वस्तुओं का boycott
- सरकारी उपाधियों का त्याग
- राष्ट्रीय शिक्षण संस्थानों को बढ़ावा
यह आंदोलन पहली बार बड़े स्तर पर mass movement बना।
चौरी-चौरा कांड – 1922
5 फरवरी 1922 को उत्तर प्रदेश के चौरी-चौरा में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हिंसक घटना हुई।
पुलिस थाने में आग लगा दी गई और पुलिसकर्मियों की मृत्यु हुई।
गांधीजी ने अहिंसा के सिद्धांत के कारण असहयोग आंदोलन वापस ले लिया।
14. साइमन कमीशन – 1927
ब्रिटिश सरकार ने 1927 में Simon Commission नियुक्त किया।
इसमें एक भी भारतीय सदस्य नहीं था।
इसलिए भारत में इसका व्यापक विरोध हुआ।
प्रसिद्ध नारा:
“Simon Go Back”
15. नेहरू रिपोर्ट – 1928
Simon Commission के विरोध के बीच भारतीय नेताओं ने संवैधानिक व्यवस्था का अपना प्रस्ताव तैयार किया।
मोतीलाल नेहरू की अध्यक्षता में समिति ने Nehru Report तैयार की।
यह भारत के संवैधानिक विकास के इतिहास में महत्वपूर्ण दस्तावेज है।
16. पूर्ण स्वराज्य का प्रस्ताव – 1929
लाहौर अधिवेशन, 1929 में कांग्रेस ने पूर्ण स्वराज्य (Purna Swaraj) को अपना लक्ष्य घोषित किया।
इस अधिवेशन की अध्यक्षता जवाहरलाल नेहरू ने की।
इसके बाद 26 जनवरी 1930 को पहली बार Independence Day के रूप में मनाया गया।
17. सविनय अवज्ञा आंदोलन – 1930
1930 में गांधीजी ने Civil Disobedience Movement शुरू किया।
इसका सबसे प्रसिद्ध symbol था:
दांडी मार्च
गांधीजी ने 12 मार्च 1930 को साबरमती आश्रम से दांडी की यात्रा शुरू की।
6 अप्रैल 1930 को उन्होंने दांडी पहुँचकर नमक कानून तोड़ा।
महत्व
नमक जैसी रोजमर्रा की वस्तु को आंदोलन का symbol बनाकर गांधीजी ने बड़ी संख्या में सामान्य लोगों को आंदोलन से जोड़ा।
18. गांधी-इरविन समझौता – 1931
5 मार्च 1931 को गांधीजी और वायसराय लॉर्ड इरविन के बीच समझौता हुआ।
इसके बाद गांधीजी ने द्वितीय Round Table Conference में भाग लिया।
हालाँकि सम्मेलन से भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन की अपेक्षाएँ पूरी नहीं हुईं और Civil Disobedience Movement बाद में फिर शुरू हुआ।
19. पूना पैक्ट – 1932
1932 में महात्मा गांधी और डॉ. बी.आर. अंबेडकर के बीच समझौते के परिणामस्वरूप Poona Pact हुआ।
इसने Depressed Classes के प्रतिनिधित्व से संबंधित व्यवस्था को प्रभावित किया।
यह घटना भारतीय सामाजिक और राजनीतिक इतिहास में महत्वपूर्ण है।
20. भारत सरकार अधिनियम – 1935
Government of India Act, 1935 ब्रिटिश भारत के संवैधानिक इतिहास का एक महत्वपूर्ण कानून था।
इसके प्रमुख प्रावधानों में:
- Provincial Autonomy
- प्रांतीय स्तर पर जिम्मेदार सरकार
- संघीय व्यवस्था की प्रस्तावित योजना
- मताधिकार का विस्तार
शामिल थे।
इसके तहत 1937 में प्रांतीय चुनाव हुए।
कांग्रेस ने कई प्रांतों में सरकारें बनाईं।
21. द्वितीय विश्व युद्ध और भारतीय राजनीति – 1939
1939 में ब्रिटेन ने भारत को भारतीय नेताओं की सहमति के बिना World War II में शामिल कर दिया।
कांग्रेस ने इसका विरोध किया।
1939 में कांग्रेस की प्रांतीय सरकारों ने इस्तीफा दे दिया।
22. व्यक्तिगत सत्याग्रह – 1940
1940 में गांधीजी ने Individual Satyagraha शुरू किया।
इसके पहले सत्याग्रही विनोबा भावे थे।
बाद में जवाहरलाल नेहरू सहित अन्य नेताओं ने भी इसमें भाग लिया।
23. क्रिप्स मिशन – 1942
1942 में ब्रिटिश सरकार ने Sir Stafford Cripps के नेतृत्व में Cripps Mission भारत भेजा।
इसका उद्देश्य भारतीय राजनीतिक दलों को युद्ध के दौरान ब्रिटिश प्रयासों में सहयोग के लिए समझौते का प्रस्ताव देना था।
भारतीय नेताओं ने प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया।
24. भारत छोड़ो आंदोलन – 1942
8 अगस्त 1942 को बंबई में अखिल भारतीय कांग्रेस समिति ने Quit India Movement का प्रस्ताव पारित किया।
गांधीजी ने नारा दिया:
“करो या मरो”
9 अगस्त 1942 को गांधीजी सहित कई शीर्ष नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया।
इसके बाद आंदोलन कई क्षेत्रों में spontaneous mass resistance के रूप में आगे बढ़ा।
महत्व
भारत छोड़ो आंदोलन ने ब्रिटिश शासन को स्पष्ट संकेत दिया कि भारत में colonial rule की स्वीकार्यता तेजी से समाप्त हो रही थी।
25. आजाद हिंद फौज और सुभाष चंद्र बोस
सुभाष चंद्र बोस ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ armed struggle का रास्ता अपनाया।
उन्होंने Indian National Army (INA) के नेतृत्व को संगठित और मजबूत किया।
उनका प्रसिद्ध आह्वान था:
“तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा।”
INA की गतिविधियों ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में एक अलग सैन्य dimension जोड़ा।
26. INA Trials – 1945–46
द्वितीय विश्व युद्ध के बाद INA के अधिकारियों पर दिल्ली के लाल किले में मुकदमे चलाए गए।
इन trials के खिलाफ भारत के कई हिस्सों में व्यापक जनसमर्थन देखने को मिला।
इससे भारतीय राष्ट्रीय भावना और अधिक मजबूत हुई।
27. रॉयल इंडियन नेवी विद्रोह – 1946
फरवरी 1946 में Royal Indian Navy के भारतीय ratings ने बंबई में विद्रोह शुरू किया।
यह आंदोलन बाद में कई स्थानों तक फैला।
इस घटना ने ब्रिटिश सरकार के लिए भारतीय armed forces में बढ़ते असंतोष को उजागर किया।
28. कैबिनेट मिशन – 1946
1946 में ब्रिटिश सरकार ने Cabinet Mission भारत भेजा।
इसके प्रमुख सदस्य थे:
- Lord Pethick-Lawrence
- Sir Stafford Cripps
- A.V. Alexander
इसका उद्देश्य भारत के constitutional future का रास्ता तलाशना था।
इस मिशन ने संविधान सभा और संघीय व्यवस्था से संबंधित प्रस्ताव दिए।
29. अंतरिम सरकार – 1946
सितंबर 1946 में जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में Interim Government बनी।
बाद में मुस्लिम लीग भी इसमें शामिल हुई, लेकिन राजनीतिक मतभेद जारी रहे।
30. माउंटबेटन योजना – 3 जून 1947
Lord Mountbatten भारत के अंतिम वायसराय बने।
3 जून 1947 को उन्होंने भारत के विभाजन की योजना प्रस्तुत की।
इसके आधार पर:
- भारत और पाकिस्तान के निर्माण का रास्ता साफ हुआ।
- ब्रिटिश सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया शुरू हुई।
31. भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम – 1947
Indian Independence Act, 1947 ब्रिटिश संसद ने पारित किया।
इसके परिणामस्वरूप दो नए Dominions अस्तित्व में आए:
- India
- Pakistan
32. भारत की स्वतंत्रता – 15 अगस्त 1947
15 अगस्त 1947 को भारत स्वतंत्र हुआ।
जवाहरलाल नेहरू ने स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री के रूप में कार्यभार संभाला।
इस प्रकार लगभग दो शताब्दियों के ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन का अंत हुआ।
भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की पूरी Timeline
| वर्ष | प्रमुख घटना |
|---|---|
| 1857 | विद्रोह/क्रांति |
| 1885 | भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना |
| 1905 | बंगाल विभाजन और स्वदेशी आंदोलन |
| 1906 | मुस्लिम लीग की स्थापना |
| 1907 | सूरत विभाजन |
| 1911 | बंगाल विभाजन समाप्त, राजधानी दिल्ली |
| 1915 | गांधीजी भारत लौटे |
| 1917 | चंपारण सत्याग्रह |
| 1918 | अहमदाबाद मिल हड़ताल और खेड़ा सत्याग्रह |
| 1919 | रॉलेट एक्ट और जलियांवाला बाग |
| 1920 | असहयोग आंदोलन |
| 1922 | चौरी-चौरा, असहयोग आंदोलन समाप्त |
| 1927 | साइमन कमीशन |
| 1928 | नेहरू रिपोर्ट |
| 1929 | पूर्ण स्वराज्य प्रस्ताव |
| 1930 | दांडी मार्च और सविनय अवज्ञा |
| 1931 | गांधी-इरविन समझौता |
| 1932 | पूना पैक्ट |
| 1935 | भारत सरकार अधिनियम |
| 1937 | प्रांतीय चुनाव |
| 1939 | द्वितीय विश्व युद्ध; कांग्रेस मंत्रिमंडलों का इस्तीफा |
| 1940 | व्यक्तिगत सत्याग्रह |
| 1942 | क्रिप्स मिशन और भारत छोड़ो आंदोलन |
| 1945–46 | INA Trials |
| 1946 | नौसेना विद्रोह, कैबिनेट मिशन, अंतरिम सरकार |
| 1947 | माउंटबेटन योजना, स्वतंत्रता और विभाजन |
UPSC Prelims के लिए Quick Revision
गांधी युग की महत्वपूर्ण श्रृंखला
चंपारण → खेड़ा → अहमदाबाद → रॉलेट → जलियांवाला → असहयोग → चौरी-चौरा → सविनय अवज्ञा → भारत छोड़ो
इसे ऐसे याद करें:
“चं–खे–अ–रॉ–ज–अ–चौ–स–भा”
तीन बड़े जन आंदोलन
| आंदोलन | वर्ष | मुख्य मुद्दा/विशेषता |
|---|---|---|
| असहयोग आंदोलन | 1920 | British institutions का boycott |
| सविनय अवज्ञा आंदोलन | 1930 | कानूनों का अहिंसक उल्लंघन |
| भारत छोड़ो आंदोलन | 1942 | ब्रिटिश शासन का तत्काल अंत |
एक आसान Formula
1920 – साथ छोड़ो
1930 – कानून तोड़ो
1942 – अंग्रेजों भारत छोड़ो
स्वतंत्रता आंदोलन की तीन प्रमुख धाराएँ
भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन केवल कांग्रेस के आंदोलनों तक सीमित नहीं था।
1. Constitutional/Moderate Politics
दादाभाई नौरोजी, गोखले आदि ने constitutional reforms और political representation पर जोर दिया।
2. Gandhian Mass Movements
गांधीजी ने सत्याग्रह और अहिंसा के माध्यम से mass mobilisation किया।
3. Revolutionary & Armed Resistance
भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, सुभाष चंद्र बोस और INA जैसे प्रयासों ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ अलग प्रकार का resistance प्रस्तुत किया।
इन धाराओं के उद्देश्यों, methods और political contexts में अंतर था, लेकिन सभी ने औपनिवेशिक शासन के खिलाफ भारतीय राजनीति को प्रभावित किया।
भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का महत्व
स्वतंत्रता आंदोलन ने भारत में:
- राष्ट्रीय चेतना का विस्तार किया
- औपनिवेशिक शासन को चुनौती दी
- किसानों और मजदूरों की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाई
- महिलाओं की public participation को बढ़ाया
- प्रेस और राजनीतिक संगठनों को सक्रिय किया
- लोकतांत्रिक और संवैधानिक विचारों को मजबूत किया
- अंततः ब्रिटिश शासन के अंत का मार्ग तैयार किया
निष्कर्ष
भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन एक single event नहीं बल्कि कई दशकों तक चलने वाली long-term political and social process थी।
1857 के विद्रोह से लेकर 1885 में कांग्रेस की स्थापना, 1905 के स्वदेशी आंदोलन, गांधीजी के असहयोग और सविनय अवज्ञा आंदोलनों, 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन, INA गतिविधियों और 1946 की राजनीतिक घटनाओं तक अनेक developments ने स्वतंत्रता के अंतिम चरण को प्रभावित किया।
अंततः 15 अगस्त 1947 को भारत स्वतंत्र हुआ, हालांकि स्वतंत्रता के साथ देश का विभाजन भी हुआ।
UPSC के लिए इस पूरे chapter को याद रखने का सबसे आसान तरीका है:
1857 → कांग्रेस → स्वदेशी → गांधी → असहयोग → सविनय अवज्ञा → भारत छोड़ो → स्वतंत्रता
यही भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की basic chronological backbone है।
