IPS

1960 के दशक में शुद्ध खाद्य आयातक से भारत विश्व में एक शुद्ध खाद्य निर्यातक के रूप में उभरा। कारण दीजिये।

भारत 1960 के दशक में भारत का खाद्य आयातक से निर्यातक बनना: एक विस्तृत विश्लेषण 1960 के दशक में भारत […]

1960 के दशक में शुद्ध खाद्य आयातक से भारत विश्व में एक शुद्ध खाद्य निर्यातक के रूप में उभरा। कारण दीजिये। Read More »

UPSC NOTES

भारत में सर्वोच्च न्यायालय के लिये क्षेत्रीय पीठ स्थापित करने की आवश्यकता का मूल्यांकन कीजिये।

सर्वोच्च न्यायालय Supreme Court of India भारत में सर्वोच्च न्यायालय के लिए क्षेत्रीय पीठ: एक मूल्यांकन भारत में सर्वोच्च न्यायालय

भारत में सर्वोच्च न्यायालय के लिये क्षेत्रीय पीठ स्थापित करने की आवश्यकता का मूल्यांकन कीजिये। Read More »

UPSC NOTES

हिमालय क्षेत्र में ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOFs) की संवेदनशीलता को बढ़ाने वाले कारकों का परीक्षण करते हुए इससे संबंधित जोखिमों को कम करने हेतु प्रभावी रणनीतियाँ बताइये।

GLOFs की संवेदनशीलता बढ़ाने वाले कारक GLOFs हिमालय क्षेत्र में GLOFs की घटनाओं में वृद्धि के पीछे कई कारक जिम्मेदार

हिमालय क्षेत्र में ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOFs) की संवेदनशीलता को बढ़ाने वाले कारकों का परीक्षण करते हुए इससे संबंधित जोखिमों को कम करने हेतु प्रभावी रणनीतियाँ बताइये। Read More »

UPSC NOTES

जनसंख्या भूगोल के संदर्भ में वहन क्षमता की अवधारणा पर चर्चा कीजिये।

जनसंख्या भूगोल में वहन क्षमता की अवधारणा जनसंख्या वहन क्षमता एक ऐसी अवधारणा है जो किसी निश्चित पर्यावरण में किसी

जनसंख्या भूगोल के संदर्भ में वहन क्षमता की अवधारणा पर चर्चा कीजिये। Read More »

“जलवायु परिवर्तन कूटनीति, अंतर्राष्ट्रीय संबंधों के एक महत्त्वपूर्ण पहलू के रूप में उभरी है।” वैश्विक जलवायु वार्ता के संदर्भ में भारत की स्थिति एवं योगदान का मूल्यांकन करते हुए इससे संबंधित चुनौतियों तथा अवसरों पर प्रकाश डालिये। 

जलवायु परिवर्तन कूटनीति में भारत की भूमिका: चुनौतियाँ और अवसर जलवायु परिवर्तन निश्चित रूप से अंतर्राष्ट्रीय संबंधों का एक केंद्र

“जलवायु परिवर्तन कूटनीति, अंतर्राष्ट्रीय संबंधों के एक महत्त्वपूर्ण पहलू के रूप में उभरी है।” वैश्विक जलवायु वार्ता के संदर्भ में भारत की स्थिति एवं योगदान का मूल्यांकन करते हुए इससे संबंधित चुनौतियों तथा अवसरों पर प्रकाश डालिये।  Read More »

भक्ति और सूफी आंदोलनों को अक्सर आध्यात्मिक प्राप्ति के समानांतर मार्ग के रूप में देखा जाता है। इनके मूल सिद्धांतों के बीच तुलना एवं अंतर बताते हुए समाज पर इनके प्रभाव की चर्चा कीजिये।

भक्ति और सूफी आंदोलन: एक तुलनात्मक अध्ययन भक्ति और सूफी आंदोलन, दोनों ही मध्यकालीन भारत में उभरे धार्मिक आंदोलन थे,

भक्ति और सूफी आंदोलनों को अक्सर आध्यात्मिक प्राप्ति के समानांतर मार्ग के रूप में देखा जाता है। इनके मूल सिद्धांतों के बीच तुलना एवं अंतर बताते हुए समाज पर इनके प्रभाव की चर्चा कीजिये। Read More »

गुप्तकालीन सिक्काशास्त्रीय कला की उत्कृष्टता उत्तरवर्ती कल में देखने को नहीं मिली। टिप्पणी कीजिये।

गुप्तकालीन (लगभग 320 ईस्वी से 550 ईस्वी तक) को भारतीय इतिहास का स्वर्ण युग माना जाता है। इस काल में

गुप्तकालीन सिक्काशास्त्रीय कला की उत्कृष्टता उत्तरवर्ती कल में देखने को नहीं मिली। टिप्पणी कीजिये। Read More »