प्राकृतिक वनस्पति FOR UPSC IN HINDI
प्राकृतिक वनस्पति प्राकृतिक वनस्पति से तात्पर्य उन पौधों से है जो मानव की सहायता के बिना स्वयंमेव वन्य अथवा प्राकृतिक […]
प्राकृतिक वनस्पति प्राकृतिक वनस्पति से तात्पर्य उन पौधों से है जो मानव की सहायता के बिना स्वयंमेव वन्य अथवा प्राकृतिक […]
वन्य जीवन भारत की पारिस्थितिक व भौगोलिक दशाओं में विविधता पायी जाती है। इसी विविधता के कारण यहां अनेक प्रकार
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भूपृष्ठ की वह उपरी सतह, जिसका विकास यांत्रिक एवं रासायनिक अपक्षय, अपरदन एवं जलवायु के तत्वों (तापमान एवं जल) के
यद्यपि मिट्टी के निर्माण में चट्टानों का योगदान निर्विवाद रूप से स्वीकृत है, तथापि जलवायु के तत्व, धरातलीय संरचना, जीव-जंतु,
मृदा कृषि का आधार है। यह मनुष्य की आधारभूत आवश्यकताओं, यथा- खाद्य, ईंधन तथा चारे की पूर्ति करती है। इतनी
भारत का विशाल एवं विविधतापूर्ण आकार सर्वाधिक महत्वपूर्ण संसाधन है। कुल भूमि का लगभग 43 प्रतिशत मैदानी क्षेत्र खेती के
कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था का मेरुदण्ड है। जहां एक ओर यह प्रमुख रोजगार प्रदाता क्षेत्र है। वहीं सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी)
भारतीय कृषि को मुख्य रूप से तीन भागों में विभाजित किया गया है: स्थानांतरण कृषि कृषि की इस पद्धति के
कृषि प्रदेश भारत में भौगोलिक विभिन्नताओं ने कृषि फसलों में भी अनेक विभिन्नताओं को जन्म दिया है। वर्षा, तापमान, समुद्र
योजना आयोग ने भारत की 15 कृषि जलवायविक क्षेत्रों में वर्गीकृत किया है जिसके अंतर्गत प्रदेशों में व्याप्त सामाजिक-आर्थिक दशाओं
योजना आयोग के कृषि-जलवायविक क्षेत्र FOR UPSC IN HINDI Read More »