Upsc History Notes Hindi : असहयोग आंदोलन (Non-Cooperation Movement) भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का एक महत्वपूर्ण जन-आंदोलन था, जिसका नेतृत्व महात्मा गांधी ने किया। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने 1920 में इसे अपनाया और इसका उद्देश्य ब्रिटिश शासन के साथ सहयोग समाप्त करके Swaraj की दिशा में आगे बढ़ना था।
यह आंदोलन अचानक शुरू नहीं हुआ था। इसके पीछे Rowlatt Act, Jallianwala Bagh massacre, पंजाब में दमन, Khilafat issue और ब्रिटिश सरकार की नीतियों से बढ़ता असंतोष जैसे कई कारण थे। सितंबर 1920 के Calcutta Special Session में Non-Cooperation का प्रस्ताव रखा गया और दिसंबर 1920 के Nagpur Session में इसे कांग्रेस ने औपचारिक रूप से स्वीकार किया।
असहयोग आंदोलन क्या था : Upsc History Notes Hindi
असहयोग आंदोलन का मूल विचार था कि ब्रिटिश शासन भारतीयों के सहयोग के बिना प्रभावी रूप से नहीं चल सकता।
गांधीजी का मानना था कि यदि भारतीय
सरकारी स्कूलों और कॉलेजों का बहिष्कार करें,
ब्रिटिश अदालतों का बहिष्कार करें,
सरकारी उपाधियां छोड़ें,
विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार करें,
सरकारी संस्थाओं से दूरी बनाएं,
तो ब्रिटिश शासन की administrative और economic foundation कमजोर हो सकती है।
History Notes इसलिए इसे “Non-Cooperation” यानी ब्रिटिश शासन के साथ सहयोग न करने का आंदोलन कहा गया।
असहयोग आंदोलन कब शुरू हुआ ?
असहयोग आंदोलन का औपचारिक राजनीतिक आरंभ 1920 में हुआ।
Important Timeline
| घटना | वर्ष/तारीख |
|---|---|
| Rowlatt Act | 1919 |
| Jallianwala Bagh massacre | 13 अप्रैल 1919 |
| Amritsar Congress Session | दिसंबर 1919 |
| Calcutta Special Session | सितंबर 1920 |
| Nagpur Congress Session | दिसंबर 1920 |
| असहयोग आंदोलन का प्रमुख चरण | 1920–1922 |
| Chauri Chaura घटना | 5 फरवरी 1922 |
| आंदोलन वापस लिया गया | फरवरी 1922 |
Calcutta Special Session में Non-Cooperation का प्रस्ताव बड़ी बहुमत से पारित हुआ और दिसंबर 1920 के Nagpur Session में कांग्रेस ने इसे अपनाया।
असहयोग आंदोलन क्यों शुरू किया गया ?
अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल आखिर गांधीजी और कांग्रेस ने असहयोग आंदोलन शुरू क्यों किया ?
इसके पीछे कई कारण थे।
1. रॉलेट एक्ट का विरोध
1919 का Rowlatt Act असहयोग आंदोलन की पृष्ठभूमि तैयार करने वाली महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक था।
History Notes इस कानून के तहत सरकार को राजनीतिक गतिविधियों पर कठोर कार्रवाई और बिना सामान्य न्यायिक प्रक्रिया के detention जैसी शक्तियां मिलीं।
गांधीजी ने इसका विरोध किया और देशव्यापी Rowlatt Satyagraha का आह्वान किया।
इससे ब्रिटिश शासन के प्रति असंतोष और बढ़ा।
2. जलियांवाला बाग हत्याकांड
13 अप्रैल 1919 को अमृतसर के Jallianwala Bagh में जनरल Reginald Dyer के आदेश पर निहत्थी भीड़ पर गोलीबारी हुई।
इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया।
इसके बाद ब्रिटिश सरकार की न्यायप्रियता और भारतीयों के प्रति उसके रवैये पर लोगों का विश्वास और कमजोर हुआ।
1919 के Amritsar Congress Session में Jallianwala Bagh massacre की निंदा की गई और Rowlatt Act को समाप्त करने की मांग भी उठी।
इसका प्रभाव
जलियांवाला बाग ने
- ब्रिटिश शासन के प्रति आक्रोश बढ़ाया
- nationalist politics को मजबूत किया
- गांधीजी की राजनीति को अधिक व्यापक जनसमर्थन दिया
- British institutions के boycott की जमीन तैयार की
3. पंजाब में ब्रिटिश दमन
Jallianwala Bagh के बाद पंजाब में martial law और अन्य दमनात्मक कार्रवाइयों की खबरों ने देशभर में गुस्सा पैदा किया।
इससे यह धारणा मजबूत हुई कि British government भारतीयों के शांतिपूर्ण राजनीतिक अधिकारों को भी दबा रही है।
1919 के Amritsar Congress Session में पंजाब के घटनाक्रम की निंदा की गई थी।
4. खिलाफत आंदोलन का समर्थन
असहयोग आंदोलन का एक महत्वपूर्ण कारण Khilafat Issue भी था।
प्रथम विश्व युद्ध के बाद Ottoman Empire और Ottoman Caliphate के भविष्य को लेकर भारतीय मुसलमानों में असंतोष पैदा हुआ।
भारत में Khilafat Movement के नेता ब्रिटिश सरकार से इस मुद्दे पर न्यायपूर्ण व्यवहार की मांग कर रहे थे।
गांधीजी ने Khilafat leaders के साथ cooperation किया और इसे व्यापक anti-colonial movement से जोड़ने का प्रयास History Notes किया।
इससे Hindu-Muslim political cooperation को बढ़ावा देने की कोशिश हुई।
भारत सरकार के ऐतिहासिक स्रोत भी 1920 के Non-Cooperation phase को Khilafat और Jallianwala Bagh के संदर्भ से जोड़ते हैं।
5. ब्रिटिश सरकार से मोहभंग
पहले विश्व युद्ध के दौरान बड़ी संख्या में भारतीयों ने ब्रिटिश war effort में सहयोग किया था।
कई भारतीय नेताओं को उम्मीद थी कि युद्ध के बाद भारत में political reforms और self-government की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठेंगे।
लेकिन 1919 के घटनाक्रम—विशेषकर Rowlatt Act और Punjab repression—ने इन उम्मीदों को कमजोर कर दिया।
इसलिए History Notes कांग्रेस के भीतर British government के साथ cooperation की पुरानी नीति पर सवाल उठने लगे।
6. Swaraj की मांग
असहयोग आंदोलन का सबसे बड़ा राजनीतिक उद्देश्य Swaraj था।
गांधीजी और कांग्रेस ब्रिटिश शासन के साथ सहयोग History Notes करके सुधार प्राप्त करने के History Notes बजाय जनता को एक बड़े peaceful mass movement में mobilise करना चाहते थे।
1920 के Calcutta Special Session में Non-Cooperation resolution को Swaraj की मांग से जोड़ा गया था।
7. ब्रिटिश संस्थाओं का बहिष्कार
असहयोग आंदोलन केवल protest करने का अभियान नहीं था।
इसका उद्देश्य British institutions से systematic non-cooperation था।
इसके तहत लोगों से कहा गया कि वे—
- Government schools और colleges छोड़ें
- British courts का boycott करें
- सरकारी उपाधियां वापस करें
- Legislative Councils से दूरी बनाएं
- foreign goods का boycott करें
- Swadeshi वस्तुओं को अपनाएं
Nagpur Session में इन कार्यक्रमों को कांग्रेस के आंदोलन का History Notes महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया।
असहयोग आंदोलन के प्रमुख कार्यक्रम
असहयोग आंदोलन में कई constructive और boycott activities शामिल थीं।
1. सरकारी स्कूलों और कॉलेजों का बहिष्कार
Students से government educational institutions छोड़ने और national educational institutions से जुड़ने की अपील की गई।
2. सरकारी अदालतों का बहिष्कार
Lawyers और जनता से British courts से दूरी बनाने का आह्वान किया गया।
3. सरकारी उपाधियों का त्याग
लोगों से British government द्वारा दी गई honorary titles वापस करने की अपील की गई।
4. विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार
विशेषकर foreign cloth के boycott पर जोर दिया गया।
5. Swadeshi और Khadi
भारतीय वस्तुओं के उपयोग और Khadi को बढ़ावा दिया गया।
6. जनसभाएं और प्रचार
Meetings, rallies और volunteer organisations के History Notes माध्यम से movement को गांवों और कस्बों तक पहुंचाया गया।
इन कार्यक्रमों को 1920 के Congress resolutions में स्पष्ट रूप से शामिल किया गया था।
असहयोग आंदोलन में गांधीजी की रणनीति
गांधीजी की strategy का आधार था:
Non-Violence + Non-Cooperation + Mass Participation
उनका विचार था कि यदि बड़ी संख्या में भारतीय British institutions के साथ cooperation बंद कर दें, तो colonial administration पर pressure बढ़ेगा।
इसलिए आंदोलन का official character peaceful और non-violent mass movement रखा गया था।
History Notes : असहयोग आंदोलन में जनता की भागीदारी
इस आंदोलन की एक बड़ी विशेषता इसका व्यापक social participation था।
इसमें विभिन्न क्षेत्रों के—
- Students
- Teachers
- Lawyers
- Traders
- Farmers
- Women
- Workers
- सामान्य नागरिक
ने अलग-अलग स्तर पर भाग लिया।
History Notes अलग-अलग क्षेत्रों में आंदोलन का स्वरूप स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार अलग रहा।
उदाहरण के लिए Andhra Pradesh के Nandigama क्षेत्र में public meetings और anti-tax activities के माध्यम से आंदोलन को समर्थन मिला।
History Notes : असहयोग आंदोलन और महिलाओं की भूमिका
महिलाओं ने भी आंदोलन में भाग लिया।
उन्होंने—
- Khadi को अपनाया
- foreign cloth के boycott का समर्थन किया
- public campaigns में हिस्सा लिया
- राष्ट्रीय आंदोलन के लिए जनसमर्थन जुटाने में योगदान दिया
कस्तूरबा गांधी ने भी महिलाओं को Khadi अपनाने, government schools/colleges के boycott और सामाजिक सुधारों से जुड़ने के लिए प्रेरित किया।
History Notes : असहयोग आंदोलन का आर्थिक पक्ष
आंदोलन का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य British economic interests को challenge करना भी था।
Foreign cloth के boycott और Swadeshi products के promotion से भारतीय उत्पादन और स्थानीय industries को बढ़ावा देने की कोशिश हुई।
यह विचार पहले के Swadeshi Movement से जुड़ा हुआ था।
इसलिए दोनों आंदोलनों को इस तरह समझ सकते हैं:
Swadeshi Movement → Economic Nationalism
Non-Cooperation Movement → Political + Economic Non-Cooperation
History Notes : असहयोग आंदोलन और हिंदू-मुस्लिम एकता
1920–22 के phase में Congress और Khilafat leadership के बीच cooperation हुआ।
इससे हिंदू और मुस्लिम नेताओं तथा कार्यकर्ताओं के बीच संयुक्त political mobilisation को बढ़ावा मिला।
यह उस समय national movement को व्यापक आधार देने की कोशिश का महत्वपूर्ण हिस्सा था।
हालांकि बाद के वर्षों में यह राजनीतिक एकता कमजोर हुई और परिस्थितियां बदलती गईं।
असहयोग आंदोलन वापस क्यों लिया गया?
यह UPSC में बहुत important question है।
मुख्य कारण: Chauri Chaura घटना
5 फरवरी 1922 को उत्तर प्रदेश के Chauri Chaura में protesters और police के बीच हिंसक टकराव हुआ।
भीड़ ने police station में आग लगा दी और 22 पुलिसकर्मियों की मृत्यु हुई।
गांधीजी का आंदोलन non-violent था।
उन्हें लगा कि आंदोलन के कुछ हिस्सों में हिंसा बढ़ रही है और जनता अभी उस स्तर के disciplined non-violent struggle के लिए पूरी तरह तैयार नहीं है।
इसलिए उन्होंने फरवरी 1922 में आंदोलन वापस लेने का निर्णय लिया।
History Notes : क्या असहयोग आंदोलन सफल था?
इस प्रश्न का उत्तर balanced तरीके से देना चाहिए।
उपलब्धियां
- National movement को mass character मिला।
- कांग्रेस का जनाधार व्यापक हुआ।
- British institutions के boycott की strategy सामने आई।
- Khadi और Swadeshi को political symbolism मिला।
- Students, women और अन्य social groups की participation बढ़ी।
- British rule की legitimacy को चुनौती मिली।
सीमाएं
- आंदोलन अपने घोषित political objective तक नहीं पहुंच सका।
- Chauri Chaura के बाद इसे अचानक वापस लेना पड़ा।
- सभी क्षेत्रों और वर्गों में participation समान नहीं था।
- कई local movements के अपने अलग economic और social objectives थे।
इसलिए इसे तत्काल राजनीतिक सफलता के बजाय mass nationalist mobilisation के बड़े चरण के रूप में समझना अधिक उचित है।
History Notes : असहयोग आंदोलन की Timeline
| वर्ष/तारीख | घटना |
|---|---|
| 1919 | Rowlatt Act |
| 13 अप्रैल 1919 | Jallianwala Bagh massacre |
| दिसंबर 1919 | Amritsar Congress Session |
| सितंबर 1920 | Calcutta Special Session |
| दिसंबर 1920 | Nagpur Congress Session |
| 1921 | आंदोलन का व्यापक विस्तार |
| 5 फरवरी 1922 | Chauri Chaura घटना |
| फरवरी 1922 | आंदोलन वापस लिया गया |
UPSC Prelims के लिए Important Facts
याद रखने वाले 8 Facts
1. असहयोग आंदोलन — 1920
2. प्रमुख नेता — महात्मा गांधी
3. प्रमुख पृष्ठभूमि — Rowlatt Act और Jallianwala Bagh
4. महत्वपूर्ण राजनीतिक connection — Khilafat Movement
5. Calcutta Special Session — सितंबर 1920
6. Nagpur Session — दिसंबर 1920
7. Chauri Chaura — 5 फरवरी 1922
8. आंदोलन वापस — फरवरी 1922
UPSC Mains में कैसे लिखें?
अगर प्रश्न आए:
“असहयोग आंदोलन शुरू करने के प्रमुख कारणों की चर्चा कीजिए।”
तो Answer का structure इस तरह रखें:
Introduction
1920 में गांधीजी के नेतृत्व में शुरू हुआ History Notes असहयोग आंदोलन British colonial rule के खिलाफ एक व्यापक अहिंसक mass movement था।
Causes
Political Causes
- Rowlatt Act
- Jallianwala Bagh
- Punjab repression
- Swaraj की मांग
Religious/Political Cause
- Khilafat Issue
- Hindu-Muslim cooperation
Economic Cause
- Foreign goods का विरोध
- Swadeshi और Khadi
Strategic Cause
- British institutions से Non-Cooperation
- Mass mobilisation
Conclusion
असहयोग आंदोलन तत्काल Swaraj प्राप्त नहीं कर सका, लेकिन इसने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन को एक व्यापक जन-आंदोलन में बदलने History Notes में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
