UPSC Result 2025: दुकानों में ‘कैरी बैग’ सप्लाई करने वाले की बेटी बनी अफसर, नवादा की रितिका पांडेय ने AIR 185 लाकर किया कमाल

UPSC Success Story in Hindi: कहते हैं कि जहाँ चाह होती है, वहाँ राह अपने आप बन जाती है। सफलता अक्सर उन्हीं के कदम चूमती है जो अनुशासन, दृढ़ संकल्प और अटूट परिश्रम के साथ अपने लक्ष्य का पीछा करते हैं। बिहार के नवादा जिले की रितिका पांडेय ने इसी बात को सच कर दिखाया है।

सीमित संसाधनों और आर्थिक तंगी के बावजूद रितिका ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा 2025 में 185वीं रैंक हासिल कर पूरे जिले का नाम रोशन किया है।

पिता के संघर्ष को बनाया अपनी ताकत

रितिका नवादा जिले के हिसुआ नगर परिषद क्षेत्र के पांचू मोहल्ले की रहने वाली हैं। उनके पिता, संजय पांडेय, एक साधारण व्यवसायी हैं जो स्थानीय दुकानों में कैरी बैग (Carry Bag) सप्लाई करने का काम करते हैं। आर्थिक तंगी के बाद भी संजय पांडेय का जुनून अपनी बेटी को उच्च शिक्षा दिलाना था। रितिका अपनी इस सफलता का पूरा श्रेय अपने पिता की मेहनत और उनके अटूट समर्थन को देती हैं।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि: शुरुआत से ही रही हैं मेधावी

रितिका की सफलता अचानक नहीं मिली; वे शुरू से ही पढ़ाई में अव्वल रही हैं:

  • स्कूली शिक्षा: उन्होंने झारखंड और दिल्ली से अपनी प्रारंभिक पढ़ाई पूरी की।
  • 12वीं बोर्ड: रांची के मनन विद्या स्कूल से पढ़ाई करते हुए उन्होंने 12वीं की परीक्षा में पूरे झारखंड राज्य में दूसरा स्थान प्राप्त किया था।
  • स्नातक (Graduation): दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित गार्गी कॉलेज से भौतिकी (Physics Honours) में स्नातक किया, जहाँ उन्होंने 9.7 CGPA के साथ अपने बैच में दूसरा स्थान हासिल किया।

तीसरे प्रयास में मिली सफलता (The Journey of 3 Attempts)

UPSC की डगर रितिका के लिए आसान नहीं थी। उन्होंने अपने तीसरे प्रयास में यह मुकाम हासिल किया है:

  1. पहला प्रयास: वे केवल प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) के चरण तक पहुँच सकीं।
  2. दूसरा प्रयास: उन्होंने इंटरव्यू (साक्षात्कार) तक का सफर तय किया, लेकिन अंतिम मेरिट लिस्ट में जगह नहीं बना पाईं।
  3. तीसरा प्रयास: हार न मानने के जज्बे के साथ उन्होंने तैयारी जारी रखी और अंततः AIR 185 हासिल की।

सेल्फ स्टडी और परिवार का सहयोग

आर्थिक चुनौतियों को मात देने के लिए रितिका ने मुख्य रूप से खुद के बल पर (Self-study) और केंद्रित प्रयासों से तैयारी की। उनकी माँ, बबीता पांडेय, एक गृहिणी हैं और उनके परिवार में दो बहनें (कृति और पूजा) तथा एक छोटा भाई (हर्ष पांडेय) हैं, जो उनकी इस उपलब्धि पर गर्व महसूस कर रहे हैं।

निष्कर्ष: रितिका पांडेय की कहानी उन सभी छात्रों के लिए एक बड़ी प्रेरणा है जो मामूली पृष्ठभूमि से आते हैं और बड़े सपने देखते हैं। उनकी यह जीत साबित करती है कि अगर परिवार का साथ और खुद पर भरोसा हो, तो वित्तीय बाधाएं सफलता का रास्ता नहीं रोक सकतीं।


You May Also Like