कश्मीर घाटी को बाह्य हिमालय और दक्षिण में मैदानी इलाकों के साथ जोड़ता है।
2. बारा-लाचा-ला दर्रा
हिमाचल प्रदेश के लाहौल को लेह ज़िले से जोड़ता है।
3. फोटू-ला दर्रा
लेह को कारगिल से जोड़ता है।
4. रोहतांग दर्रा
कुल्लू घाटी को हिमाचल प्रदेश की लाहौल और स्पीति घाटी से जोड़ता है।
5. शिपकी ला दर्रा
हिमाचल प्रदेश को तिब्बत के स्वायत्त क्षेत्र से जोड़ता है।
6. जेलेप ला दर्रा
सिक्किम को तिब्बत के स्वायत्त क्षेत्र से जोड़ता है।
7. नाथू ला दर्रा
सिक्किम को तिब्बत के स्वायत्त क्षेत्र से जोड़ता है।
8. लिपूलेख दर्रा
भारत की चौड़न घाटी को तिब्बत के स्वायत्त क्षेत्र से जोड़ता है। यह उत्तराखंड, चीन और नेपाल के ट्राई-जंक्शन पर स्थित है।
9. खार्दूंग ला
लद्दाख को सियाचिन ग्लेशियर से जोड़ता है। यह विश्व का सबसे ऊँचा मोटर वाहन योग्य दर्रा है।
10. बोम-डि-ला दर्रा
यह अरुणाचल प्रदेश में है। अरुणाचल प्रदेश को तिब्बत की राजधानी ल्हासा से जोड़ता है
कहां है पुलिकट झील तथा उसका महत्व
लिकट झील
पुलिकट झील भारत के पूर्वी तट पर स्थित एक अद्वितीय जलाशय है।
यह दो राज्यों आंध्र प्रदेश (84%) और तमिलनाडु(16%) में विस्तृत है।
इसका निर्माण समुद्र से बालू के अलग होने से हुआ है।
मानसून के दौरान इसका जल प्रसार क्षेत्र लगभग 720 वर्ग किलोमीटर हो जाता है।
झील की लंबाई लगभग 60 किमी है, तथा इसकी चौड़ाई 200 मीटर से 17.5 किमी तक परिवर्तित होती रहती है।
झील के पूर्वी किनारे पर बकिंघम नहर उत्तर से दक्षिण दिशा में श्रीहरिकोटा द्वीप के सापेक्ष प्रवाह करती है।
सतीश धवन अंतरिक्ष केन्द्र इसी झील के निकट श्री हरिकोटा द्वीप पर स्थित है।
पुलिकट झील एक लेगुन झील है|
महत्व
झील को प्रवाहमयी नदियों और नहरों के माध्यम से ताजा अथवा अक्षारीय जल तथा बंगाल की खाड़ी से जुड़े इनलेट माउथ के माध्यम से समुद्री जल प्राप्त होता है।
झील में एक स्थानिक और कलिक अथवा अस्थाई लवणता ढाल है। यह ढाल विभिन्न पादपों तथा जंतुओं की विविधता से परिपूर्ण पारिस्थितिकीय निकेत की उत्पत्ति में सहायक होती है।
पुलिकट झील के आसपास के 200 गांवों में रहने वाले लगभग एक लाख लोग अपनी आजीविका के लिए अपने समृद्ध मत्स्य संसाधनों के साथ अत्यधिक उत्पादक लैगून पारिस्थितिकी तंत्र पर प्रत्यक्ष रूप से निर्भर हैं।
पुलिकट झील एक जैव विविधता हॉटस्पॉट भी है। जो प्रकृति के संरक्षण के लिए आवश्यक ,आईयूसीएन की रेड डाटा बुक में सम्मिलित , कई स्थानिक और लुप्तप्राय प्रजातियों को आश्रय देती है।
यह कई प्रवासी पक्षियों के लिए एक एवियन स्वर्ग है तथा चरम प्रवासन की ऋतु में ययः पक्षियों की लगभग 250 प्रजातियां आती हैं जिनमें से 50 अंतरमहाद्वीपीय प्रजातियां हैं।
हिमायल के बारे में रोचक जानकारी
हिमालय
हिमालय दुनिया की सबसे ऊँची और सबसे छोटी मोड़दार पर्वत शृंखलाएँ हैं।
उनकी भू-वैज्ञानिक संरचना नई, कमज़ोर और लचीली हैं क्योंकि हिमालय का उत्थान एक सतत् प्रक्रिया है, जो इसे दुनिया के सबसे अधिक भूकंप संभावित क्षेत्रों में से एक बनाती है।
यह भारत को उसकी उत्तर-मध्य और उत्तर-पूर्वी सीमा के साथ-साथ चीन (तिब्बत) से अलग करता है।
हिमालय का भारतीय भाग लगभग 5 लाख वर्ग किमी. (देश के कुल भौगोलिक क्षेत्र का लगभग 16.2%) क्षेत्र को कवर करता है और देश की उत्तरी सीमा का निर्माण करता है।
यह क्षेत्र भारतीय उपमहाद्वीप के एक बड़े हिस्से को पानी उपलब्ध कराने के लिये ज़िम्मेदार है।
गंगा और यमुना जैसी पवित्र मानी जाने वाली कई नदियाँ हिमालय से निकलती हैं।
शृंखलाएँ
हिमालय उत्तर-पश्चिम से दक्षिण-पूर्व दिशा तक फैली समानांतर पर्वत श्रेणियों की एक शृंखला है। इन श्रेणियों को अनुदैर्ध्य घाटियों द्वारा अलग किया जाता है। इनमें सम्मिलित हैं